अब सुन नेता – खैरात नहीं यह देश किसी के बाप की
नेहरू गाँधी क्या बात करेंगे जनता के औकात की
हिला दिया है एक हजारे ने भ्रश्तानदित सिंहासन
रामदेव ने करा दिया पुरे गण का यूँ शिर्शाशन
सिब्बल, सहाय अशहाए हुए, मनमोहन की पगड़ी डोली
जनता की एक दहाड़ ही सुन, सरकार हिली सरकार हिली

धधक रही जो हर सीने में , यह गर्मी है उस ताप की
अब सुन नेता – खैरात नहीं यह देश किसी के बाप की

कई जिलानी बात करे, बंटवारे की मैदोनों में
तुम साले सोते ही रह गए मखमल के पैमानों में
पैबंद लगे ईमान तुम्हारे, हर पल सीते रहते हो
जनता जब आवाज़ लगाये , तुम गोद में पीते रहते हो
जन से ही गर कोई निकल के गण, जब भी तुमको ललकारा है
तुम डायर बन गए, हर नेता तब लगे मुझे हत्यारा है

राजनीती अब जन करेगी, तुम सब हो साले पातकी
अब सुन नेता – खैरात नहीं यह देश किसी के बाप की

अब संधि नहीं बस रण होगा
और देर नहीं इस छण होगा
अब लीला होगी उसी राम की , उसी जगह जो तुमने दिया
और पात्र भी होंगे वही जिसे तय पल भर पहले तुमने किया
मखमल के उन्हीं बिछ्वानों की अब कफ़न तुम्हे पहनाएंगे
और राम की नाद भरेगा जन, तब दहन तुम्हे करवाएंगे

न्याय करेगी अब जनता अधिकार नहीं यह आपकी
अब सुन नेता – खैरात नहीं यह देश किसी के बाप की

(उपेन्द्र दुबे )

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