छोड़ करुण क्रंदन दुःख का , हुँकार की एक ललकार भरो |

गिरकर उठना तो जीवन है,शंघर्ष की जयजयकार करो | |

महिकाल काल को रौंदा था, इस बार भी तुम महिन्भार भरो |

उठ आज प्रहार करो ऐसा, निश्तब्ध बद्ध संसार करो | |

जयकार करो. जयकार करो……

सत नमन तुम्हारी जीवटता , महिमामंडित नित निर्भीकता |

चिर प्रशंशनीय वो कर्मठता, परिभाषित वृत्त की जीवटता  | |

मत मौन रहो यौवन भर तुम, गर्वित यौवन आकार करो |

निर्भय बन भय संहार करो, प्रतिकार करो प्रतिकार करो | |

जयकार करो. जयकार करो……

कर त्याग प्रतीक बने गण  का, गणतंत्र रचित अभिमान करो |

पथ आप प्रशश्त करो अपना ,  मत व्यर्थ ये जीवनदान करो | |

जन गान करो , निज मान करो , संकल्पित कर्म प्रधान करो.

जन गान करो जन गान करो | |

उनमत्त नियंत्रित गान नमन  , जो वरण किया निर्वाण अहम् | |

कल्पित संगर्भित मान मनन,  उत्थान अहम् , जनगान अहम् |

किन्तु न पराजित होने का, यह काल नहीं अब रोने का | |

अति  अंत अनंत का नाद लिए, संग्राम है यह अब होने का

उच्च श्रिंखल गण निज दम्भित का निर्भीक बन अब संधान करो,

अब वार करो संहार करो , जनतंत्र की जय जयकार करो

जयकार करो जयकार करो

(उपेन्द्र दुबे )

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