मैं फेसबुक पर, कमेन्ट कमेन्ट खेल रहा था |

अपना जीवन बड़े आराम से झेल रहा था | |

कि, तभी एक दिन मेरे कमेन्ट पर कमेन्ट आया |
ठहरी जिंदगी में, जैसे कोई करेंट आया | |

कहने लगी फोटो के नीचे , अजी क्या कमाल लगते हो होठों को भींचे |

मैंने भी दाढ़ी खुजाई, और कमेन्ट का धीरे से किया रिप्लाई | |

सोचा गलती से कमेन्ट किया होगा शेयर |

वरना, ऐसे ही फेसबुक पर थोड़े ही बनता है पेयर | |

अगले १५ मिनट जीवन के, आपातकाल से लगे |
सारे  ओनलाईन मित्र थोड़े सवाल  से लगे | |

मैंने चाय बनायीं और प्याली हाथ में ले,  फेसबुक फिर बैठा मेरे भाई …

पेज रिफ्रेश को मैंने बटन दबाई , प्याली कि चाय थोड़ी और गरमाई

मेरे अकाउंट पर कमेन्ट कि बाढ़ थी, कमेन्ट वाली बूंदी कि लगती कोई पहाड थी

तुम बड़े डैशिंग , वैशिंग से लगते हो
मेरी झील सी आँखों में बसते  हो

कमरा और जीवन मेरा भी है खाली

मैं हूँ एक फूल बन जाओ मेरे माली

नंबर जो दिया है, उसे करो डायल

अब और इंतज़ार न करवाना , वरना हो जाऊंगी मैं घायल
मैंने आओ देखा न ताव ,फटाक से नंबर पर लगाया दाँव
उधर से “हेलो बेबी ” कि आवाज आई, जिंदगी ने फिर से पलटी  खायी

आवाज़ कुछ मोटी , लगती रानी मुखर्जी के गले कि खराश थी

जैसे जेठ कि दुपहरी में झुलसी कोई मधुमास थी

उसने कहा –

“मैं २४ साला लेडी ब्यॉय हूँ,

डार्लिंग तुम्हारे मर्दानेपन पर मैं बिलकुल आय हाय हूँ  ”

अपने जिंदगी के नट पर मेरे बोल्ट को कर लो फिट,

एक दूजे के लिए जियेंगे , दोनों हो जायेंगे हिट

अरे कुछ तो बोलो मेरे मखमली चमन

और कितना सुलगाओगे , मेरा ए रेशमी बदन

इतना सुनते ही मेरे दिमाग का ट्रांसफार्मर हो गया फ्यूज
चेहरा अखबार के कागज सा, जैसे मेरे ही बलात्कार का हो फ्रंट पेज न्यूज

मैंने फोन पटका , और उस जगह से थोडा दूर हटा

फोन फिर से बजा

आवाज वही, कुछ उसी अंदाज़ में

जैसे घुटता हुआ सुर, टूटे साज में

मैंने कहा , मैं लड़के का बाप हूँ
इधर फोन न करना, वरना मैं भी एक अभिशाप हूँ

उसने यु टर्न लिया, अपनी सांसों को थोडा और बर्न किया
कहने लगी –
“ओ मेरी बीडी कि जलती हुई राख
ओढा बुढ़ापा , अपनी जवानी कर दी खाख
पर कोई बात  नहीं, मैं तुमसे ही काम चलाउंगी
क्या हुआ जो लड़का भोंपू है, मैं तुम्हारी ही पूंगी बजाउंगी”

सुन प्रेम का ऐसा संवाद

दिल हो गया तार तार
मैंने कहा मोहतरमा , मुझे माफ करो

ऐसे न मेरी लुटिया साफ़ करो

माँ कसम , अब कभी न कोई जोर आजमाइश होगी,

क्या तुम अकेले कम हो, जो देश में ऐसी और पैदाइश होगी

लंबी साँसे ले वो बोली, अबे तम्बोली !!!

ऐसे क्यूँ रोता है

दुनिया मजे लेती है , तू क्यूँ खोता  है????

मेरी इज्ज़त पर हाथ डालते तुझे क्यूँ शर्म आती है
जब अपने ही देश कि नपुंसक सरकार, माँ को लुटते नहीं शरमाती है ??

तू लगता पैदाइशी लफड़ा है, टूटी एक्सल का कोई छकडा है

ऐसे पंक्चर पर, और कील क्या मारना

तुझ जैसे लल्लू पर, दिल क्या हारना

मैंने चैन कि सांस लिया

माँ कसम , फेसबुक पर फिर कभी कोई रिप्लाई नहीं किया

पर आज सोचता हूँ …कि एक बात तो वो सच कह गयी

जो भी हो, मेरे भेजे में रच बस गयी

अपनी माँ  को नंगा करते , ए मुट्ठी भर लोग

लुटा कर दामन माटी का, रहे हैं बस अपना सुख भोग

असली लेडी ब्वाय तो ए सत्ता के व्यापारी हैं

और लल्लू तो दारु कम्बल पर बिकती अपनी जनता प्यारी है

वरना एक टुच्चा सा पडोसी माँ का ताज न हथियाता

और सेकुलरिज्म का रोना, एक गीत बन, बहनों के मुजरों पर यूँ ताली न बजाता

बहनों के मुजरों पर यूँ ताली न बजता….

–उपेन्द्र दुबे (२९/०४/२०१२ )

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