ब्लॉग परिचय

मन के झंझावत को शब्दों का रूप देने का एक प्रयास है यह |
एक ऐसी अभिव्यक्ति जो सिन्धु के ज्वार  से भी ज्यादा अस्थिर है एवं जिसका संग्रहण संभवतः असंभव  है, परन्तु सागर की नन्हीं लहरें भी कभी कभी किनारों के पत्थर पर एक चिन्ह छोड़ जाते हैं सदैव के लिए , और तब उन लहरों का अस्तित्व चिरंजीव हो जाता है |

कुछ इसी उम्मीद के साथ मैं भी , उन्मत्तता के उस वेग , अन्तः में उठती निराशा की पराकाष्ठ को सहेजने की अधूरी कोशिश , भावनाओं का प्रतिरूपण एवं मन में उठते सुलझे उन्सुल्झे विचारों को शब्दों का जामा पहना आपके समक्ष प्रभावी रूप से रखने की कोशिश इस माध्यम के द्वारा करने जा रहा हूँ .

मेरा यह प्रयास  सदैव आपके सानिध्य का आकांक्षी रहेगा |

— उपेन्द्र दुबे

6 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. Naveen Yadav
    सितम्बर 20, 2011 @ 14:28:13

    Hum aap key is praayas ki puri sarahana kartey hai . aap bahumukhi prtibha key dhani vyakti hai .
    aap nirantar apeny oouch vichar apney blog par likhtey rahey .
    Hum bhi samvedanaao ka samjhney ka prayaas kartey rahengey

    प्रतिक्रिया

  2. hsonline
    अक्टूबर 04, 2011 @ 18:01:29

    हमारा सान्निध्य सदैव रहेगा! शुभकामनाएं !!!

    -हितेन्द्र

    प्रतिक्रिया

  3. Soma Mukherjee
    दिसम्बर 10, 2011 @ 09:47:44

    Upendra main aapki ek kavita nayi puraani halchal mei bhejna chahti hu …yaha link post kar rahi hu agar aapko sweekrat ho toh aap bataye ya khud bhi unke diye gaye gmail par apni chuni hui kavita bheje.
    नयी पुरानी हलचल (http://nayi-purani-halchal.blogspot.com/)

    प्रतिक्रिया

  4. ranjan zeherila
    जनवरी 05, 2012 @ 19:13:28

    Dubey ji,

    Aap ambikapur jaise chhote se shehar se uth kar aaye hain aapn 36gadh anchal ka gaurav hain..isi terah lekhni ke tej se humein achambhit aur romanchit aur prerit karte rehiye

    प्रतिक्रिया

  5. glass insulators value
    जून 13, 2012 @ 17:19:30

    आप एक बहुत महान वेबसाइट है, मुझे खुशी है कि मैं इसे याहू के माध्यम से देखा.

    प्रतिक्रिया

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